वयोवृद्ध नेता एन डी तिवारी का 93वें जन्मदिन पर निधन / उत्तराखंड में शोक की लहर /तीन दिन का राजकीय शोक घोषित

तिवारी के निधन पर उत्तराखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है ।

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देहरादून-उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के निधन से प्रदेश में शोक की लहर दौड गयी है। राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत तमाम लोगों ने उनकी मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त इसे देश के लिये अपूरणीय क्षति बताया है और उनके योगदान का स्मरण किया।

तिवारी के निधन पर उत्तराखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है । इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे । उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने तिवारी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके शोक संतप्त परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की है ।

यहां राजभवन से जारी अपने शोक संदेश में राज्यपाल मौर्य ने दिवंगत नेता को एक लोकप्रिय जन नेता और कुशल प्रशासक बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया । उन्होंने कहा कि उनके निधन से राष्ट्र एवं समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा दलगत राजनीति से उपर उठकर काम किया ।

मुख्यमंत्री रावत ने सोशल मीडिया में पोस्ट किये अपने शोक संदेश में कहा, ‘ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं ।’ उन्होंने कहा कि तिवारी जी का जाना उनके लिये व्यक्तिगत क्षति भी है । उन्होंने कहा कि विरोधी दल में होने के बावजूद मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने दलगत राजनीति से उपर उठकर अपना स्नेह बनाये रखा ।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ तिवारीजी के जाने से भारत की राजनीति में जो शून्य उभरा है, उसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है। तिवारीजी देश के वित्त मंत्री, उद्योग मंत्री और विदेश मंत्री जैसे अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं ।’ रावत ने कहा कि उत्तराखंड तिवारी के योगदान को कभी भुला नहीं पायेगा । उन्होंने कहा कि नवोदित राज्य उत्तराखंड को आर्थिक और औद्योगिक विकास की रफतार से अपने पैरों पर खडा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभायी थी ।

रावत ने संवाददाताओं से बातचीत में भी वर्ष 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा राज्य के लिये स्वीकृत औद्योगिक पैकेज में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री के तौर पर उनके योगदान को याद किया और कहा कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि में तिवारी के कुशल नेतृत्व तथा विकास की सोच की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि तिवारी विशाल ह्दय के व्यक्ति थे जो उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहते हुए युवा विधायकों के मार्गदर्शक भी रहे। उन्होंने तिवारी जी के निधन को एक युग का अन्त बताते हुए कहा कि उनके निधन से राजनीति में आयी रिक्तता की भरपाई कठिन है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने यहां प्रदेश पार्टी मुख्यालय तिवारी निधन पर दो मिनट का मौन रख उन्हें भावभीनी श्रद्वाजंलि अर्पित की।

इस मौके पर सिंह ने शोक व्यक्त करते हुए तिवारी को एक महान व्यक्तित्व बताया और कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद इतनी राजनीतिक बुलंदियों को छूना एक मिसाल है ।

तिवारी मंत्रिमंडल में बतौर मुख्यमंत्री काम कर चुके सिंह ने कहा कि उन्होंने नवनिर्मित राज्य को एक दिशा देने का काम किया ।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि दिवंगत नेता के सम्मान में प्रदेश में बृहस्पतिवार से 20 अक्टूबर तक राजकीय शोक घोषित किया गया है और इस अवधि में प्रदेश के समस्त जिलों के राजकीय कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में राजकीय शोक के दिवसों में कोई भी शासकीय मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित नही किये जायेंगे।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी समझे जाने वाले तिवारी पार्टी के नेतृत्व वाली कई सरकारों में केन्द्रीय मंत्री रहे थे। उन्हें दो राज्यों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने का अद्वितीय गौरव हासिल था।

राजीव गांधी की हत्या के बाद तिवारी 1991 के लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट से हार गये थे और इसी के साथ वह प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पीवी नरसिंहा राव से पिछड़ गए थे।

उन्होंने 1995 में राव के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस छोड़कर पार्टी के वयोवृद्ध नेता अर्जुन सिंह के साथ मिलकर एक अलग दल कांग्रेस (टी) बना लिया था।

हालांकि सोनिया गांधी के कांग्रेस की कमान संभालने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था।

वह उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे थे। वह 2002-2007 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे।

2007 से 2009 तक वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे लेकिन एक कथित सेक्स स्कैंडल के कारण उन्हें इस्तीफा देना पडा था। उनके पुत्र रोहित शेखर तिवारी उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पिछले वर्ष जनवरी में भाजपा में शामिल हो गये थे।

18 अक्टूबर,1925 को नैनीताल में जन्में तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया,‘‘एनडी तिवारी जी के निधन से दुखी हूं। वह एक बड़े नेता थे जो अपने प्रशासनिक कौशल के लिए जाने जाते थे। उन्हें औद्योगिक विकास की दिशा में उनके प्रयासों और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड की प्रगति के वास्ते काम करने के लिए याद रखा जाएगा।’’

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी तिवारी के निधन पर शोक जताया और उन्हें एक महान नेता और एक कुशल मंत्री बताया।

तिवारी की पत्नी उज्जवला तिवारी को भेजे शोक संदेश में सिंह ने कहा, ‘‘दो राज्यों उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, विदेश मंत्री एवं वित्त मंत्री तथा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर उनकी सेवा को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।’’

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