वित्त मंत्रालय ने सितंबर की जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई

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नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर (भाषा) वित्त मंत्रालय ने सितंबर महीने के लिये जीएसटीआर-3बी बिक्री रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को पांच दिन बढ़ाकर 25 अक्टूबर कर दिया है। इसके साथ ही, जुलाई 2017 से मार्च 2018 की अवधि के लिये इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने वाले कारोबारी भी आईटीसी का 25 अक्टूबर तक दावा कर सकते हैं।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि कारोबारियों और उद्योगों ने जीएसटी के तहत जुलाई 2017 से मार्च 2018 के लिये इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर होने पर चिंता जताई थी।
सीबीआईसी ने ट्वीट में कहा, “इसे देखते हुये सितंबर के लिये जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 25 अक्टूबर 2018 किया गया है।”
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत किसी महीने का जीएसटीआर-3बी उसके अगले महीने की 20 तारीख तक दाखिल करना होता है। इस लिहाज से सितंबर महीने का जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने का समय 20 अक्टूबर था।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “जुलाई 2017 से मार्च 2018 अवधि के लिये इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने की अंतिम तिथि को भी बढ़ाकर 25 अक्टूबर 2018 कर दिया गया है।
इसे लेकर कारोबारियों ने चिंता जताते हुये कहा था कि 20 अक्टूबर तक आपूर्तिकर्ता द्वारा दाखिल खरीद रिटर्न से उनके बिक्री रिटर्न का मिलान संभव नहीं होगा।

आईटीसी का लाभ बिक्री रिटर्न या जीएसटी-3बी के आधार पर लेने की सुविधा है, इसलिए आईटीसी के दावों और जीएसटी-3बी के लिए समयसीमा समान रखी गई है।

माल एवं सेवा कर व्यवस्था एक जुलाई 2017 से लागू हुयी है।
बयान में कहा गया है कि मंत्रालय ने कहा था कि जो करदाता पुरानी कर व्यवस्था से जीएसटी व्यवस्था में आये हैं उनके लिये जुलाई 2017 से मार्च 2018 की अवधि के लिये आईटीसी का लाभ लेने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 या वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की तिथि जो भी पहले होगी।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर और लीडर (अप्रत्यक्ष कर) प्रतीक जैन कहा कि जिन कारोबारियों ने 20 अक्टूबर तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है उन्हें इस विस्तार का लाभ मिल सकता है। हालांकि, ज्यादातर बड़ी कंपनियों को इससे मदद नहीं मिलेगी क्योंकि वह पहले ही ओवरटाइम करके रिटर्न दाखिल कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “चूंकि रिटर्न में संशोधन के लिए कोई सुविधा नहीं है, इसलिए ये कंपनियां उन क्रेडिट का दावा नहीं कर सकतीं जिन्हें वे भूल गये थे।”

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