शीतकाल के लिए गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद

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उत्तरकाशी, आठ नवंबर (भाषा) गंगोत्री धाम के कपाट बृहस्पतिवार को अन्नकूट के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में कर सकेंगे । श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि मंदिर के कपाट विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद दोपहर 12:30 बजे अमृत बेला के शुभ अवसर पर बंद कर दिए गए ।
उन्होंने बताया कि कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन पड़ाव स्थल मुखीमठ या मुखवा गांव के लिए रवाना हुई जो कल अपने गंतव्य पर पहुंचेगी ।
आगामी छह माह तक मुखवा स्थित मां गंगा मंदिर में ही पूजा अर्चना की जाएगी।
जैसे ही मां गंगा की डोली मंदिर परिसर से बाहर निकली तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। सेना की महार रेजिमेंट के जवानों के बैंड की धुन और परंपरागत ढोल दमाऊं की थाप के साथ तीर्थ पुरोहित गंगा की डोली को लेकर शीतकालीलन प्रवास मुखवा गांव के लिए पैदल रवाना हुए।
मंदिर के कपाट बंद होने के दौरान गंगोत्री के विधायक गोपाल रावत, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, गंगोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारी और जिलाधिकारी आशीष चौहान मौजूद थे ।
गंगोत्री समेत गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारों धामों के कपाट शीतकाल में बर्फबारी की चपेट में रहने के कारण हर साल श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल—मई में खुलते हैं।
उत्तरकाशी जिले में ही स्थित एक अन्य धाम यमुनोत्री तथा रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट कल भैयादूज के अवसर पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे जबकि चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ मंदिर के कपाट 20 नवंबर को बंद होंगे ।

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