संविधान तैयार करने की असाधारण गति रिकार्ड समय में दायित्व पूरे करने की प्रेरणा देती है : मोदी

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नयी दिल्ली, 25 नवंबर :भाषा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि देश की महान विभूतियों ने असाधारण गति से तीन वर्ष के भीतर विस्तृत संविधान तैयार किया और इससे सभी को आज भी अपने दायित्व रिकॉर्ड समय में पूरे करने की प्रेरणा मिलती है ।

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि छह दिसम्बर को बाबा साहब आंबेडकर का महा-परिनिर्वाण दिवस है और वह सभी देशवासियों की ओर से बाबा साहब को नमन करते हैं जिन्होंने करोड़ों भारतीयों को सम्मान से जीने का अधिकार दिया।

उन्होंने जोर दिया कि ‘इंडिया फ़र्स्ट’ डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर का ही मूलमंत्र था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कल ‘संविधान दिवस’ है, उन महान विभूतियों को याद करने का दिन, जिन्होंने हमारा संविधान बनाया।

मोदी ने कहा कि 26 नवम्बर 1949 को संविधान अपनाया गया था। संविधान तैयार करने के इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने में संविधान सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 17 दिन लगे थे।

उन्होंने कहा ‘‘कल्पना कीजिये, तीन वर्ष के भीतर ही इन महान विभूतियों ने हमें इतना व्यापक और विस्तृत संविधान दिया। इन्होंने जिस असाधारण गति से संविधान का निर्माण किया वो आज भी समय प्रबंधन और उत्पादकता का एक शानदार उदाहरण है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘यह हमें भी अपने दायित्वों को रिकार्ड समय में पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।’’

उन्होंने कहा कि संविधान सभा देश की महान प्रतिभाओं का संगम थी। इन प्रतिभाओं में से हर कोई अपने देश को एक ऐसा संविधान देने के लिए प्रतिबद्ध था जिससे भारत के लोग सशक्त हों, ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति भी समर्थ बने।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान में खास बात यह है कि अधिकार और कर्तव्य के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। नागरिकों के जीवन में इन्हीं दोनों का तालमेल देश को आगे ले जाएगा।

उन्होंने कहा ‘‘अगर हम दूसरों के अधिकार का सम्मान करेंगे तो हमारे अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जायेगी। इसी तरह अगर हम संविधान में वर्णित अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे तो भी हमारे अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जायेगी।’’

मोदी ने कहा कि उन्हें याद है कि 2010 में जब भारत के गणतंत्र को 60 साल पूरे हुए थे तब गुजरात में हाथी पर रख कर संविधान की शोभा-यात्रा निकाली गई थी। युवाओं में संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए और उन्हें संविधान के पहलुओं से जोड़ने के लिए यह एक यादगार प्रसंग था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में एक गणतंत्र के रूप में हम 70 साल पूरे करेंगे और 2022 में हमारी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे। ऐसे में हम सभी अपने संविधान के मूल्यों को आगे बढ़ाएँ और अपने देश में शांति, उन्नति एवं समृद्धि सुनिश्चित करें।

मोदी ने कहा कि संविधान सभा के बारे में बात करते हुए डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता जो संविधान सभा के केंद्र में रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र बाबा साहब के स्वभाव में रचा-बसा था । संविधान सभा में उन्होंने एक बहुत भावुक अपील की थी कि इतने संघर्ष के बाद मिली स्वतंत्रता की रक्षा हमें अपने खून की आखिरी बूँद तक करनी है। वह यह भी कहते थे कि हम भारतीय भले ही अलग-अलग पृष्ठभूमि के हों, लेकिन हमें देशहित को सभी चीज़ों से ऊपर रखना होगा।

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