शीर्ष वन अधिकारी उत्तराखंड हाईकोर्ट में पेश

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नैनीताल, 12 अप्रैल :भाषा: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रमुख सचिव :वन: आनंद वर्धन को बाघों की सुरक्षा और रखरखाव के लिये राज्य सरकार द्वारा 2007 से अब तक उठाये गये कदमों के बारे में 23 अप्रैल तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये ।

वर्धन को न्यायालय ने ये निर्देश तब दिये जब वह व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश हुए। मामले के संबंध में प्रश्नों का जवाब देने के लिये अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं होने के बाद उच्च न्यायालय ने वर्धन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था ।

वारंट को रद्द करते हुए न्यायालय ने वर्धन को बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के बारे में 2007 में केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में राज्य द्वारा उठाये गये कदमों पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा ।

इससे पूर्व, मामले में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया था कि राज्य में बाघों की संख्या गिरती जा रही है लेकिन राज्य सरकार वन्यजीव तस्करों और शिकारियों से बाघों को बचाने के लिये कोई कार्रवाई नहीं कर रही है ।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति एनएस धनिक ने इस पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा था ।

अपने जवाब में राज्य सरकार ने कहा था कि केंद्र सरकार के 2007 में दिये गये निर्देशों का पालन करने के आदेश विभिन्न विभागों को दिये गये हैं। इन निर्देशों में बाघों की संख्या पर नजर रखना, बाघ सरंक्षण बल की स्थापना करना और सीसीटीवी कैमरा लगाना शामिल था।

इस जवाब पर अदालत ने प्रमुख सचिव वन को पेश होने तथा प्रश्नों के उत्तर देने को कहा था। हालांकि, प्रमुख सचिव अदालत में पेश होने में विफल रहे जिसपर अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया ।