किडनी के लिए जोखिम भरा है मोटापा :विशेषज्ञ

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नयी दिल्ली:भाषा: किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों के लिए डॉक्टर मोटापे की समस्या को जोखिम भरा बताते हैं और देश में किडनी प्रतिरोपण की बढ़ती जरूरत को देखते हुए कैडेवर अंग दान की दिशा में जागरकता लाने की वकालत करते हैं।

नौ मार्च को विश्व किडनी दिवस के मौके पर विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा और क्रोनिक किडनी रोग :सीकेडी: का मेल एक घातक स्थिति हो सकती है।

फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ रेनल साइंसेस एंड ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ संजीव गुलाटी के अनुसार फोकल सेगमेंटल ग्लूमेरलोक्लेरोसिस :एफएसजीएस: एक खतरनाक स्थिति है जिससे गुर्दा खराब होने का डर होता है और इसमें उपचार का विकल्प केवल डायलासिस या किडनी प्रतिरोपण रह जाता है। गौरतलब है कि मोटापा एफएसजीएस का एक प्रमुख कारण है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2025 तक मोटापा दुनियाभर में 18 प्रतिशत पुरषों और 21 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करेगा। इस तरह के संकेत भी हैं कि मोटापा क्रोनिक किडनी डिसीज :सीकेडी: के लिए हमेशा जोखिम भरा होता है और अंतिम स्तर की किडनी की बीमारियां :ईएसआरडी: भी इससे हो सकती हैं।

मोटापे से सीकेडी की आशंका दो तरह से हो सकती है। टाइप 2 डायबिटीज बढ़ने, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग बढ़ने से परोक्ष रूप से यह बीमारी बढ़ सकती है और किडनी तथा शरीर के अन्य तंत्रों पर कामकाज का बोझ बढ़ने से किडनी को सीधा नुकसान हो सकता है।

डॉ गुलाटी के अनुसार मोटापा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सीकेडी का कारण है। पिछले पांच साल में बच्चों में भी मोटापे के मामले देखने को मिले हैं। वयस्कों की तरह बच्चों को भी सीकेडी का जोखिम हो सकता है।

उन्होंने इससे बचने के उपायों में रक्त शर्करा स्तर को संतुलित रखना, नियमित व्यायाम करना, स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना और वजन नियंत्रित रखना, अधिक तरल पदार्थ लेना और खूब पेयजल पीना, धूम्रपान नहीं करना और प्राणायाम, योग तथा ध्यान करना बताया।

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