चंद वर्षो में देश में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

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125 करोड़ आबादी वाले इस देश की अधिकांश जनता के लिए बुलेट ट्रेन एक सपना है जिसे हमने अब तक तस्वीरों में कभी जापान में तो कभी चीन में दौड़ते हुए देखा है। लेकिन अब ये सपना हकीकत में बदलने वाला है। कुछ ही साल में देश की पहली बुलेट ट्रेन पटरियों पर हवा से बातें करती दिखाई देगी। सरकारी अनुमान के अनुसार देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पांच छः वर्षो तक तैयार हो जाएगी। यह बुलेट ट्रेन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को अहमदाबाद से जोड़ेगी। भारत सरकार ये परियोजना जापान की मदद से बना रही है। बुलेट ट्रेन के सपने को साकार करने के लिए अनुमान है की 1,10,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें 88,000 करोड़ रुपये जापान कर्ज के तौर पर भारत को देगा। ये कर्ज 0.1 प्रतिशत के ब्याज पर मिलेगा और भारत ये कर्ज 50 साल में चुका सकेगा। कर्ज चुकाने की शुरुआत कर्ज मिलने के 15 साल के भीतर करनी होगी

भारत बुलेट ट्रेन पर 1,10,000 करोड़ रुपये 5 साल में खर्च करेगा यानी सालाना 20,000 करोड़। और इस 1,10,000 करोड़ में 88,000 करोड़ रुपये भारत को कर्ज के तौर पर जापान दे रहा है। इस कर्ज पर ब्याज भी नहीं के बराबर है और ये कर्ज भारत को 50 साल में जापान को चुकाना है। 0.1 प्रतिशत के ब्याज को जोड़कर गणना करें तो 88,000 करोड़ के कर्ज के बदले भारत को जापान को 90,500 करोड़ रुपये चुकाने होंगे यानी केवल 2500 करोड़ रुपये ज्यादा। फर्ज कीजिए अगर भारत सात साल बाद बुलेट ट्रेन बनाने की शुरुआत करता तो 2500 करोड़ रुपये तो मंहगाई और मुद्रास्फीति जैसी वजहों से ही बढ़ जाते। ऐसे में ये सौदा घाटे का तो बिल्कुल नहीं है। इतना ही नहीं, जापान से कर्ज के साथ ही भारत को बुलेट ट्रेन की सबसे बेहतरीन और सुरक्षित शिनकैन्सेन (Shinkansen) तकनीक भी मिलेगी और मेक इन इंडिया के तहत देश में ही कल पुर्जे बनेंगे , इससे सहयोगी उद्योग पनपेंगे , लोगो को रोज़गार मिलेगा , हमारे इंजीनियर को अवसर मिलेंगे। इतना ही नहीं कर्ज और तकनीक के साथ जापान भारत को बुलेट ट्रेन के संचालन और रख-रखाव की ट्रेनिंग देने के लिए भी तैयार है। यानी बुलेट ट्रेन परियोजना के जरिए देश में मेक इन इंडिया भी होगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

खर्च के आंकड़ों के बाद अब ज़रा बुलेट ट्रेन की वो खूबियां भी जान लीजिए जिनकी वजह से पूरी दुनिया इसकी मुरीद है। पहले चरण में बुलेट ट्रेन मुबंई और अहमदाबाद के बीच के 508 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन कैसी होगी और उसमें खूबियां होंगी, इस पर भी जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (JICA) ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी चार स्टेशनो पर रुकते हुए बुलेट ट्रेन से सिर्फ दो घंटे सात मिनट में तय होगी। मुंबई और अहमदाबाद के बीच 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं- बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरुच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती । बुलेट ट्रेन इन 12 स्टेशनों पर रुकते हुए मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी को  2 घंटे 58 मिनट में तय करेगी। इस रूट पर बुलेट ट्रेन की ऑपिरेटिंग स्पीड होगी 320 किलोमीटर प्रतिघंटा और अधिकतम स्पीड होगी 350 किलोमीटर प्रतिघंटा। 508 किलोमीटर लंबे इस रूट का 92 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड होगा, 6 प्रतिशत सुरंग में और बाकी 02 प्रतिशत ज़मीन पर होगा। यानी 508 में 468 किलोमीटर लंबा ट्रैक एलिवेडेट होगा, 27 किलोमीटर सुरंग के अंदर और बाकी 13 किलोमीटर ज़मीन पर। जापान की कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक 10 कार इंजन वाली बुलेट ट्रेन सबसे पहले इसी रूट पर चलेगी। इस ट्रेन में 750 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। भविष्य में इसे 16 कार इंजन वाली बुलेट ट्रेन में तब्दील करने का प्रस्ताव भी इस रिपोर्ट में  है। 16 कार इंजन वाली बुलेट ट्रेन में 1200 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। रिपोर्ट में मुताबिक शुरुआत के दिनों में हर दिन 36,000 लोग बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे और 30 साल यानी बाद 2053 तक इसमें सफर करने वालों की तादाद रोजाना 1,86,000 तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। शुरुआत में इस रुट पर हर दिन एक दिशा में 35 ट्रेन चलेंगी, जिसे 30 साल बाद यानी 2053 तक बढ़ाकर 105 ट्रेन प्रतिदिन करने की योजना है।

जाहिर सी बात है जब बुलेट ट्रेन से समय की इतनी बचत होगी तो इसके सफर के लिए जेब भी थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। इसलिए इसका किराया बाकी रेल किराये के मुकाबले मंहगा है, जो कि रेलवे के मौजूदा एसी फर्स्ट क्लास के किराये से भी डेढ़ गुना ज्यादा हो सकता है। मुंबई से अहमदाबाद तक के सफर के लिए एक यात्री को 2700 से 3000 रुपये के बीच किराया भरना होगा। अगर इस रुट पर हवाई जहाज के किराए की बात करें तो वो 3500 से 4000 रुपये के बीच बैठता है, जबकि उसमें यात्रियों को बीच रास्ते में कहीं उतरने की सुविधा नहीं होती। मुंबई से अहमदाबाद के बीच लक्जरी बस का किराया भी 1500 से 2000 रुपये के आसपास है। ऐसे में अगर कुछ और पैसे लगा कर बुलेट ट्रेन का तेज़ रफ्तार सफर कोई महंगा सौदा नहीं होगा। खासकर तब जब लोगों को बुलेट ट्रेन में विश्व स्तर की सुविधाएं, आराम और रोमांचक सफर का आनंद भी मिलेगा। केंद्र सरकार सपनों के इस सफर को हकीकत में बदलने की तैयारी 2018 से शुरू कर देगी और सब कुछ ठीक रहा तो  चंद वर्षो में देश की पहली बुलेट ट्रेन धड़धड़ाते हुए पटरियों पर दौड़ती दिखाई देगी।

इसके अतिरिक्त अन्य हाई स्पीड कॉरिडोर है : दिल्ली मुंबई , दिल्ली कोलकाता , मुंबई चेन्नई , दिल्ली चंडीगढ़ ,मुंबई नागपुर ,दिल्ली नागपुर।  इन सभी कॉरिडोर में भी भविष्य में हाई स्पीड ट्रेन का संचालन हो सकेगा।  इसी के अंतर्गत , रेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल निगम लिमिटेड का गठन किया है।  इस विषय पर रेल मंत्रालय गंभीरता से समीक्षा बैठक करता है।

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सरोज सिंह….लेखिका स्‍वतंत्र पत्रकार है, लेख में व्‍यक्‍त विचार उनके निजी हैं।

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