फिल्मकारों को उत्तराखण्ड के प्रति आकर्षित होने की प्रेरणा देगा यह पुरस्कार-मुख्यमंत्री

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देहरादून 04 मई, 2018-मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में सचिव सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत उत्तराखण्ड को स्पेशल मेंशन सर्टिफिकेट फाॅर फिल्म फ्रेन्डली एन्वायरमेंट पुरस्कार प्राप्त होने पर सचिव सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय को बधाई दी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रति अधिक से अधिक फिल्मकार आकर्षित हो इसके लिये देवभूमि उत्तराखण्ड की अतिथि देवो भवः की परम्परा का निर्वह्न करते हुए फिल्मकारों को बेहतर सहयोग एवं सुविधायें उपलब्ध करायी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फिल्मकारों के लिये फिल्मांकन शुल्क माफ करने से अधिक से अधिक फिल्मकार राज्य में फिल्म निर्माण के लिये आगे आयेंगे तथा इससे स्थानीय युवाओं एवं स्थानीय व्यवसायियों को भी लाभ होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उत्तराखण्ड को प्राप्त होने वाला यह पुरस्कार फिल्मकारों को उत्तराखण्ड के प्रति आकर्षित होने की प्रेरणा प्रदान करने में भी मददगार होगा।
सचिव सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद डाॅ. पंकज कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र को अवगत कराया कि सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा द मोस्ट फ्रेन्डली स्टेट अवार्ड(The Most Film Friendly State Award) के अन्तर्गत इस बार उत्तराखण्ड का भी चयन किया गया था। उत्तराखण्ड राज्य को यह पुरस्कार मिलने से प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। देश-विदेश के फिल्म निर्माता राज्य में अधिक से अधिक संख्या में आयेंगे।
डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि राज्य को यह पुरस्कार राज्य में फिल्मों की शूटिंगों के लिए निर्माता/निर्देशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयासों के लिए दिया गया है। उत्तराखण्ड नया राज्य होने के साथ ही यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र भी है। डाॅ.पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस पुरस्कार के लिए उत्तराखण्ड राज्य का चयन हम सभी के लिए गौरव की बात है। राज्य में परिषद का गठन वर्ष 2015 में ही हुआ है। अपने इस अल्प कार्यकाल में देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखण्ड राज्य का इस पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।

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