सेल ….सेल …..सेल…

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आज लाउडस्पीकर से एलान हो रहा था..सेल ….सेल …..सेल…आइये ले जाइए एक से एक बढ़कर सुंदर साड़ियां कम दामों पर….आने वाले राखी के त्योहार पर दीजिये अपनी बहनों,अपनी ननदों को साड़ियों का उपहार….1000 रु की साड़ी मात्र 400 रु में…सेल स्टॉक सीमित रहने तक।
ये सुनते ही मेरी सास आयी और बोली-” बहु आज ही जाकर तेरी बुआ सास के लिए साड़ी ले आ ,वरना तेरे ससुर जी जाएंगे तो महंगी साड़ी उठा लाएंगे”
सासू मां की अपनी ननद के लिए ऐसी भावना देखकर बहुत दुख हुआ लगा मेरे घर मे मेरी भाभी भी ऐसा सोचती तो??
है साल यही होता था।
मुझे बहुत गुस्सा आया कि क्या बहनें ननदें इतनी सस्ती है कि साल में एक बार उसे साड़ी दी जाए वो भी सेल में से??
खैर ….मैं दो साड़ी ले कर आई ,दो साड़ी देखकर मेरी सास ने पूछा-“दो किसके लिए लायी”
मैंने कहा एक बुआजी के लिए एक मेरी अपनी ननद (दीदी) के लिए”!!
इतना सुनना था कि मेरी सास चिल्लाकर बोली -मेरी बेटी को राखी पर तुम सेल की साड़ी दोगी, तुम को वो सुहाती ही नही है …मैंने उनसे कहा कि -मम्मी बुआजी भी आपकी सास की बेटी है जब वो पहन सकती है तो दीदी क्यो नही???
सास को कोई जवाब नही सूझा।
अब चलिए दूसरे दृश्य में….बहन राखी पर पीहर पहुंची ,भाई को राखी बांधी मिठाई नारियल दिया भाई ने शगुन के 500 रु उसकी थाली में रखे।घर पहुंचकर वो अपने पति से बोली भाई बहुत कंजूस हो गया है 300 कि मेरी मिठाई थी 200 रु ऑटो वाले ने ले लिए,नारियल राखी दोनों 150 के रु के यानी मेरा कुल खर्चा 650 रु और मिला क्या 500 रु।ऐसी भी राखी होती है क्या??मेरी सहेली को तो उसके भाई ने 1100 रु दिए।
तीसरा दृश्य- बहु सासू मां से बोली क्या मैं राखी पर पीहर हो आऊं??सास ने आंखें तरेर कर कहा-तेरी ननदें आएंगी उनका खाना कौन बनाएगा??साल में एक या दो बार आती है क्या तब भी उसको आराम नही मिलेगा।
उधर बहु के पीहर में भाभी राखी पर पीहर चली गयी ।
देख रहे है आप रिश्ते वही है बस अलग अलग जगह पर उनका महत्व बदल गया है।
औरतों का व्यवहार दो तरह का हो गया है।इसमे हम पुरुषों को कहीं भी दोष नही दे सकते।ये रिश्तों का जाल औरतें ही फैला रही है।जिस घर मे औरतें समझदार है वहां ये नही होता।पर ऐसा
बहुत कम है वरना ये साड़ी सेल राखी पर शहरों में नही लगती।
घरों में देखने मे आता है कि राखी लेनदेन का त्योहार बन गया है।
कही भाई भाभी कहते है की बहन इतनी सस्ती मिठाई उठा लायी,कहीं बहन कहती है मुझे बेकार साड़ी दी!!ये लेन देन ही तो है।
क्या हो गया है रिश्तों में वो अपनापन नही रहा, रु बीच मे आ गया।
मुझे दुख है कि औरत अपने स्वार्थ के लिए ऐसी ओछी हरकतें करती है। रिश्तों में दरार इन्ही से पड़ती है।
समझिए आपकी बहु किसी की बेटी है और आपकी बेटी किसी की बहू है।आपकी ननद आपके पति की बहन है और आप भी किसी की ननद है जो खुद के लिए उम्मीद करें वही दूसरों के साथ करें।

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