विश्व संवाद केन्द्र द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

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देहरादून 19 अगस्त, 2018-देवभूमि उत्तराखण्ड औद्योगिक विकास एवं कृषि विकास की सम्भावनाओं पर दो सत्रों में संगोष्ठी का आयोजन विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आॅफिस ट्रांजिट हाॅस्ट, रेसकोर्स, देहरादून में किया गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय के कुलपति डा॰ चन्द्रशेखर नौटियाल तथा दूसरे सत्र की अध्यक्षता वन विभाग के पूर्व मुख्य वन संरक्षक डा॰ आर.बी.एस. रावत ने की। दोनों सत्रों का संचालन कार्यक्रम के संयोजक समाजसेवी लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल ने किया। प्रथम सत्र के वक्ताओं में उत्तराखण्ड इण्डस्ट्रीज ऐसोशियेसन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, उद्योगपति अशोक विंदलास, डा॰ बृजमोहन शर्मा, उद्योगपति राकेश ओबराय ने अपने विचार व्यक्त किए। जबकि आभार प्रदर्शन विश्व संवाद के अध्यक्ष सुरेन्द्र मित्तल ने किया। संचालक लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल ने विश्व संवाद केन्द्र के कार्यों की भूमिका प्रस्तुत की।
उत्तराखण्ड में औद्योगिक विकास की सम्भावनाएँ विषय का प्रारम्भ स्पेक्स के सचिव डा॰ बृजमोहन शर्मा ने किया तथा उन्होंने सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थायी आधार देने के लिये लघु उद्योगों की गहनता से चर्चा की। उनका मानना है कि महत्वपूर्ण उद्योगों का जाल बिछाकर आम लोगों को जोड़ना आवश्यक है। उत्तराखण्ड इण्डस्ट्रीज ऐसोशियेसन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने अपने उद्बोधन में व्यवस्थाओं को यथार्थ में उतारने पर जोर दिया। उन्होेंने कहा कि हमारे युवाओं को नौकरी मांगने की बजाए नौकरी देने वाला बनना चाहिए। श्री गुप्ता ने उद्योगों और शिक्षण संस्थाओं के आपस सामंजस्य पर भी बल दिया। आयोजन समिति से जुड़े अशोक विंदलास ने उद्योग को आर्थिक आधार बताते हुए कहा कि उद्योगों को तेज से बढ़ाने के लिये कुछ बातें आवश्यक हैं। श्री विंदलास ने दवाओं के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की जड़ी-बूटियों के द्रव्यों का उपयोग करने और इन पर विशेष कार्य करने की चर्चा की तथा कहा कि औषधियाँ सस्ती हों यह जरूरी नहीं है पर वह गुणवत्तापूर्ण हों यह जरूरी है। उद्योगपति राकेश ओबराय ने उत्तराखण्ड के सकल घरेलू उत्पाद में उत्तराखण्ड के तीन जिलों ऊधम सिंह नगर 21 प्रतिशत, हरिद्वार 24 प्रतिशत तथा देहरादून 19 प्रतिशत के योगदान की चर्चा की तथा कहा कि अन्य जिलों का योगदान कम है। स्टार्टअप पर बोलते हुए उन्होंने अन्य जिलों के विकास की बात की। अध्यक्ष दून विश्वविद्यालय के कुलपति डा॰ चन्द्रशेखर नौटियाल ने अपने उद्बोधन में उत्तराखण्ड के सम्बन्ध में व्यावहारिक ज्ञान देने की चर्चा की। श्री नौटियाल ने कहा कि क्षेत्र की भाषाओं को विशेष पहचान दिलाई जाएग।
दूसरे सत्र का प्रारम्भ पूर्व औषधीय पादप बोर्ड उपाध्यक्ष डा. आदित्य कुमार ने किया। उन्होंने जड़ी-बूटी क्षेत्र में नेशनल मेडिकल प्लांटेशन बोर्ड की चर्चा करते हुए पिछले सत्रह वर्षों के मुख्य कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। सगंध पादप केन्द्र के निदेशक नृपेन्द्र चैहान ने 109 अरोमा क्लस्टर तथा मिन्ट से 18000 किसानों के जुड़ने की जानकार दी। श्री चैहान ने कहा कि 4-5 वर्षों में पूरे देश में उत्तराखण्ड के उत्पादकों की धूम होगी। राजेश थपलियाल ने इलायची उत्पादन से लाभ की जानकारी दी।
डा॰ वी.बी. चैरसिया ने कृषि विपणन के आर्थिक पहलू पर चर्चा करते हुए कहा कि समर्थन मूल्य बढ़ाकर सरकार किसानों को आर्थिक लाभ देना चाह रही है। उन्होंने कृषि भूमि की गुणवत्ता तथा मृदा परीक्षण पर भी विचार व्यक्त किए। जैविक कृषि करने वाले किसान दीपक उपाध्याय ने अपने साथ जुड़े किसानों की जैविक कृषि की जानकारी दी।¬¬ दून विश्वविद्याल के प्रो. एच.सी. पुरोहित ने किसानों का हित देखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊधम सिंह नगर व हरिद्वार को छोड़कर अन्य जनपदों में खेती व्यावसायिक नहीं है। अध्यक्ष डा. आर. बी. एस. रावत ने समूचे उत्तराखण्ड के परिपेक्ष्य में कृषि और वन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला तथा लोगों की शंकाओं का भी समाधान किया।
विश्व संवाद केन्द्र के निदेशक विजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर विश्व संवाद केन्द्र के सचिव राजकुमार टांक, प्रान्त सह प्रचार प्रमुख संजय कुमार, महानगर प्रचार प्रमुख हिमांशु अग्रवाल, रणजीत सिंह ज्याला, सतेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह, डा. बुद्धनाथ मिश्र, डा. विनोद मित्तल, डा. डी. पी. जोशी, प्रभाकर उनियाल, विजय स्नेही, डा. रश्मि रावत, रीता गोयल, डा. सावित्री काला, श्रीमती अनुराधा सिंह, शारदा त्रिपाठी, डा. ओ.पी कुलश्रेष्ठ, विनय वर्मा आदि प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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