It’s Everyone’s collective responsibility for protection of Himalayas: CM / जीवन को सुरक्षित करने के लिए हिमालय का संरक्षण आवश्यक है-मुख्यमंत्री

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Dehradun 01 September, 2018(DIPR)-Under the Hindustan Himalaya Bachao Abhiyan, Chief Minister Mr. Trivendra Singh Rawat administered the oath of protection of the Himalayas to the social workers, environmentalists, a team of media representatives and officers and personnel present at the CM residence on Saturday. In an informal interaction with the media, Chief Minister said that Himalaya Diwas is being celebrated on the 9th September for past many years. This year from today, the Himalaya Week has started. It is our endeavour that this should not just be confined to celebrating Himalaya Diwas for just a day. Conventions, seminars etc. will be organised at different places throughout the week. Safe Himalaya affects not only India but also a large population of the world. Protection of the Himalayas is essential for securing life. For this, along with the efforts being made by the government, everyone will have to play an important role by taking collective responsibility for the protection of the Himalayas.

Chief Minister said that about 65 per cent of our food grains are supplied from Ganga basin, whereas 65 per cent of the water supply is from the Himalayas. Himalaya’s spiritual, social, health and economic impacts have huge impact. Himalaya is also a symbol of purity. Himalayan protection is not only verbal but also spiritual. Himalayan protection is both legacy and future. Chief Minister said that Prime Minister’s Swachh Bharat Abhiyan has brought effective social and economic results. We have to pay special attention to the revival and cleanliness of our rivers. Rivers are the means of water transport and not for the transport of litter. He insisted that there is need for increasing emotional interest among the people towards tree plantation. Apart from reviving one river in each district, we have considered about reviving one water source at Block level. Work of Song Dam is progressing fast in Dehradun. Song Dam construction will not only provide gravity based water supply to the people but will throughout the year, will also save electricity expenditure.

On this occasion Swami Chidananda of Parmarth Niketan, Environmentalist Anil Joshi and retired Colonel from Eco Task Force HRS Rana was also present.

देहरादून 01 सितम्बर, 2018(सू.ब्यूरो)-मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत नें शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में हिन्दुस्तान हिमालय बचाओं अभियान के अन्तर्गत  सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, मीडिया प्रतिनिधियों के दल व उपस्थित अधिकारी व कार्मिकों को हिमालय के संरक्षण की शपथ दिलाई। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि विगत कई वर्षो से 9 सितम्बर को हिमालय दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष हिमालय सप्ताह के रूप में आज इसका शुभारम्भ हो गया है। हमारा प्रयास है कि मात्र एक दिन हिमालय दिवस मनाने से यह कर्मकाण्ड न बन कर रह जाए। पूरे सप्ताह स्थान-स्थान पर गोष्ठीयां, सेमिनार आदि आयोजित किए जाएंगे। सुरक्षित हिमालय न केवल भारत बल्कि विश्व की एक बड़ी आबादी को प्रभावित करता है। जीवन को सुरक्षित करने के लिए हिमालय का संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सबको सरकार के प्रयासों के साथ ही अपनी सामूहिक जिम्मेदारी लेकर हिमालय के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। हमारे लगभग 65 प्रतिशत खाद्यान्न की आपूर्ति गंगा बेसिन से होती है जबकि 65 प्रतिशत पानी हिमालय से ही मिलता है। हिमालय के अध्यात्मिक, सामाजिक, स्वास्थ्य व आर्थिक दृष्टि से भारी प्रभाव दृष्टिगत है। हिमालय पवित्रता का भी प्रतीक है। हिमालय संरक्षण मात्र शाब्दिक ही नही है बल्कि अध्यात्मिक भी है। हिमालय संरक्षण विरासत व भविष्य दोनों ही है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान  के प्रभावी सामाजिक व आर्थिक परिणाम आए है। हमें अपनी नदियों के पुनर्जीवीकरण व स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा। नदियां जल परिवहन का माध्यम है न कि कूड़ा-कचरा परिवहन के लिए। वृक्षारोपण के प्रति लोगों में भावनात्मक रूचि बढे़। हमने प्रत्येक जिले के एक-एक नदी के पुनर्जीवीकरण के साथ ही ब्लाॅक स्तर पर भी एक-एक जल स्त्रोत को पुनर्जीवित करने पर विचार किया है। देहरादून में सौंग बांध पर तेजी से कार्य हो रहा है। सौंग बांध निर्माण से न केवल लोगो को ग्रेविटी बेस्ड जलापूर्ति मिलेगी बल्कि सालभर बिजली का व्यय भी बचेगा।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द, पर्यावरणविद् डाॅ अनिल जोशी, ईको टास्क फोर्स से सेवानिवृत कर्नल एचआरएस राणा भी उपस्थित थे।

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