Skip to content
LOGO GALAXY BLUE final

Primary Menu
  • Home
  • LATEST
  • UTTARAKHAND NEWS
  • NATIONAL NEWS
  • INTERNATIONAL NEWS
  • HARYANA NEWS
  • PUNJAB NEWS
  • ARTICLES
  • STATES NEWS
  • CONTACT US
Live
  • Home
  • स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
  • UTTARAKHAND NEWS

स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026 1 minute read
स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
.

PIB DELHI-स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी सड़क निर्माण लागत को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जबकि पारंपरिक सड़कों की तुलना में चार गुना अधिक मजबूती प्रदान करती है। यह बात आज केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि यह तकनीक सड़कों के रखरखाव चक्र को भी काफी बढ़ा सकती है—इसमें लगभग 15 वर्षों के बाद ही रखरखाव की आवश्यकता होती है। यह एक ऐसी क्रांतिकारी ब्रेकथ्रू है जिसके प्रभाव न केवल सड़क इंजीनियरिंग पर, बल्कि संपूर्ण बुनियादी ढांचा अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस स्वदेशी तकनीक को एक परियोजना से कई परियोजनाओं तक और एक राज्य से कई राज्यों तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ रेलवे, अन्य सरकारी विभागों, राज्य सरकारों, निजी बिल्डरों, ठेकेदारों और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटरों द्वारा भी इसे व्यापक रूप से अपनाए जाने पर बल दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) नई दिल्ली और जिंदल स्टील लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से हासिल किए गए ‘प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स से बनी विश्व की सबसे लंबी सड़क’ के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रदान किये जाने वाले समारोह में बोल रहे थे। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी 1.85 किलोमीटर लंबी यह सड़क स्वदेशी तकनीक के बड़े पैमाने पर विस्तार को दर्शाती है, जो इस्पात उत्पादन के उप-उत्पाद (प्रसंस्कृत स्टील स्लैग) को सड़क निर्माण के लिए एग्रीगेट्स में परिवर्तित करती है। इस कार्यक्रम के दौरान सड़क का वर्चुअल उद्घाटन, एक साइंटिफिक डॉक्यूमेंट्री का विमोचन, सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर, ‘स्टील ग्रिट’ ब्रांड का शुभारंभ और प्रोजेक्ट टीम का सम्मान भी संपन्न हुआ।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सफल पहल एक साथ इस सरकार की एक से अधिक प्रमुख प्राथमिकताओं को पूरा करती है, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का वेस्ट टू वेल्थ रीसाइक्लिंग विकल्पों पर बार-बार दिया जाने वाला जोर भी शामिल है।

इस अवसर पर संसद सदस्य एवं जिंदल स्टील के अध्यक्ष तथा इंडियन स्टील एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री नवीन जिंदल, डीएसआईआर की सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी, नीति आयोग के पूर्व सदस्य एवं डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी.के. सारस्वत, सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. सी.एच. रवि शेखर, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, इंजीनियर, इंडस्ट्री लीडर्स और मीडियाकर्मी उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के एक साथ मिलकर काम करने से इंडस्ट्रियल वेस्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर संपदा में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के तेजी से विस्तार करते राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, पोर्ट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों—विशेष रूप से माइनिंग और क्वारींग से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक एग्रीगेट्स—को संरक्षित करने की भी एक बढ़ती हुई जिम्मेदारी आती है। ‘स्टील स्लैग रोड’ पहल इन दोनों चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक तकनीक-संचालित मार्ग प्रदान करती है: औद्योगिक उप-उत्पाद का उत्पादक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के एक साथ मिलकर काम करने से इंडस्ट्रियल वेस्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर संपदा में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के तेजी से विस्तार करते राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, पोर्ट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों—विशेष रूप से माइनिंग और क्वारींग से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक एग्रीगेट्स—को संरक्षित करने की भी एक बढ़ती हुई जिम्मेदारी आती है। ‘स्टील स्लैग रोड’ पहल दोहरी चुनौती से निपटने का एक प्रभावी मार्ग है—एक ओर औद्योगिक उप-उत्पाद का सही उपयोग, तो दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जैसे भौगोलिक रूप से विविध देश में इस तकनीक का महत्व और भी बढ़ जाता है, जहाँ कठिन इलाकों और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कें अक्सर टिकाऊ नहीं रह पातीं। पूर्वोत्तर से अपने सात साल के जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि भारी बारिश के कारण कई इलाकों में सड़क निर्माण का काम केवल चार या पाँच महीने ही हो पाता है और यहाँ तक कि एक सीजन में बनी सड़कें अगले सीजन की शुरुआत से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसलिए, ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों के लिए अधिक मजबूत और टिकाऊ सड़क प्रौद्योगिकी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ग्रामीण सड़कों के बदलते ट्रैफिक पैटर्न का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो सड़कें मूल रूप से गाँवों को जोड़ने और हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए बनाई गई थीं, आर्थिक विकास के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों का औद्योगिक विकास होने पर अब उन पर भारी ट्रक और व्यावसायिक वाहन चलने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बदलाव इस बात को रेखांकित करते हैं कि अब हमें ऐसी सड़क तकनीकों की आवश्यकता है जो अधिक वजन सहने में सक्षम हों और जिनकी मजबूती और टिकाऊपन लंबे समय तक बना रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान करते हुए कहा कि सड़क निर्माण का कार्य केवल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तक ही सीमित नहीं है। रेलवे और कई अन्य सरकारी विभाग भी सड़कों और हेवी-ड्यूटी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते हैं, जबकि प्राइवेट बिल्डर, ठेकेदार और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर इस तकनीक को अपनाने वाला एक अन्य बड़ा क्षेत्र हैं। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया, जिसमें समर्पित जागरूकता कार्यक्रम शामिल हों, ताकि इंजीनियर और कार्यान्वयन एजेंसियां इस तकनीक से भली-भांति परिचित हो सकें और अपनी-अपनी परियोजनाओं के लिए इसकी उपयोगिता का सही आकलन कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब हमारा उद्देश्य इस तकनीक को ‘एक परियोजना से कई परियोजनाओं तक और एक राज्य से कई राज्यों तक’ ले जाना होना चाहिए और अंततः ऐसे सिद्ध स्वदेशी नवाचारों को मुख्यधारा के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणालियों का हिस्सा बनाना चाहिए। सीएसआईआर-सीआरआरआई के वैज्ञानिक दिशानिर्देश, प्रसंस्करण प्रोटोकॉल और गुणवत्ता-नियंत्रण फ्रेमवर्क तकनीकी रूप से मजबूत उपयोग का आधार प्रदान करते हैं, वहीं सरकारी एजेंसियां, वैज्ञानिक संस्थान, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स मिलकर काम कर सकते हैं ताकि जहां भी यह तकनीक तकनीकी और आर्थिक रूप से उपयुक्त हो, वहां इसके क्रियान्वयन को गति दी जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र’ के साझा प्रयास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो सरकार, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और इंजीनियरों को एक मंच पर लाता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक अपनी अवधारणा और उपयोग दोनों ही दृष्टियों से पूरी तरह स्वदेशी है। अब अगले चरण में व्यापक जागरूकता फैलाने और ऐसे तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए, जिससे स्वदेशी तकनीकें प्रयोगशालाओं और प्रदर्शन परियोजनाओं से निकलकर बड़े पैमाने पर फील्ड पर लागू की जा सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘स्टील स्लैग रोड’ पहल को वेस्ट टू वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भारत को अब इस सोच से बाहर निकलना होगा कि कोई भी सामग्री महज अपशिष्ट है, क्योंकि विज्ञान और तकनीक के जरिए ऐसे संसाधनों से नया आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोफ्यूल बनाने और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मूल्यवान सामग्री निकालने की सीएसआईआर की पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रीसाइक्लिंग और रिसोर्स रिकवरी औद्योगिक विकास के अगले चरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डॉ. सतीश पांडे और सीएसआईआर-सीआरआरआई की टीम को इस तकनीक को अनुसंधान से फील्ड तक पहुँचाने में उनके निरंतर प्रयासों और समर्पण के लिए बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रतिभा को अपनी क्षमता साबित करने के लिए उपयुक्त अवसर की आवश्यकता होती है और उन्होंने वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में इस तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए बड़ा मंच और स्केल प्रदान करने का श्रेय जिंदल स्टील को दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अन्य इस्पात कंपनियां भी इसी तरह की तकनीक-संचालित समाधानों पर वैज्ञानिक संस्थानों के साथ सहयोग करने के लिए आगे आएंगी।

यह प्रौद्योगिकी पहले ही कई ऐतिहासिक पड़ाव पार कर चुकी है। हजीरा (गुजरात) में एक प्रमुख प्रदर्शन परियोजना के साथ शुरुआत करते हुए, प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र को हजीरा पोर्ट से जोड़ने वाली छह-लेन सड़क के निर्माण में किया गया था। इसके बाद यह तकनीक एनएच-66 मुंबई-गोवा राजमार्ग तक पहुंची, जहां लगभग 80,000 टन स्टील स्लैग को प्रसंस्कृत एग्रीगेट्स में बदलकर एक किलोमीटर लंबे, चार-लेन सड़क खंड का निर्माण किया गया। इस तकनीक को अरुणाचल प्रदेश में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों सहित हेवी-ड्यूटी सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए भी तैनात किया गया है।

यह प्रौद्योगिकी हजीरा पोर्ट के भीतर मल्टी-पर्पज बर्थ को कोयला यार्ड से जोड़ने वाली 1.1 किलोमीटर लंबी स्टील स्लैग सड़क के माध्यम से पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी प्रवेश कर चुकी है। यह उपयोग यह दर्शाता है कि जब उचित प्रोसेसिंग, सड़क डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण का सहारा लिया जाए, तो प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स में कठिन औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स वातावरण की जरूरतों को पूरा करने की अपार क्षमता है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराने वाली 1.85 किलोमीटर लंबी यह सड़क अब एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की राह बना रहा है। डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने कहा कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब सीएसआईआर अपने 85वें वर्ष में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है, जो संस्थान के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने घोषणा की कि सीएसआईआर-सीआरआरआई को जिंदल स्टील के अंगुल प्लांट से ओडिशा में 40 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है, जो इस तकनीक को वर्तमान 1.85 किलोमीटर के गिनीज रिकॉर्ड से आगे बढ़ाते हुए 40 किलोमीटर के विशाल पैमाने पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीआरारआई और जिंदल स्टील अब इस अगले माइलस्टोन के साथ अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को मंजिल नहीं, बल्कि इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने के अगले चरण की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता तब मिलेगी जब इस तकनीक को देश भर में उन सभी स्थानों पर लागू किया जाएगा, जहाँ यह तकनीकी और आर्थिक रूप से उपयुक्त हो। डॉ. सिंह ने सरकारी विभागों, राज्य सरकारों और निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करने का आह्वान किया, ताकि भारत में विकसित यह स्वदेशी नवाचार पूरे देश में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान बन सके।

उन्होंने कहा कि ‘स्टील स्लैग रोड’ पहल विज्ञान और उद्योग, अपशिष्ट और संपदा, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अनुसंधान और समाज की जरूरतों को एक सूत्र में पिरोती है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि भारत अब केवल स्वदेशी तकनीकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है—जिससे ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है जो किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और तकनीकी रूप से मजबूत हो।

डॉ. कलाईसेल्वी ने कहा कि यह उपलब्धि सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील की साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने सीएसआईआर के साथ इस सफल सहयोग के लिए श्री नवीन जिंदल और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों, विशेष रूप से डॉ. सतीश पांडे को बधाई दी, जिनके काम ने इस तकनीक को गुजरात में शुरुआती प्रयोगों से आगे ले जा कर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क, अरुणाचल प्रदेश और अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।

ओडिशा में आगामी 40 किलोमीटर लंबी परियोजना के साथ, यह यात्रा अब एक विश्व रिकॉर्ड से आगे बढ़कर व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने की ओर अग्रसर है। यह एक सफल परियोजना को अनेक परियोजनाओं में, एक राज्य को अनेक राज्यों में और एक औद्योगिक बाय-प्रोडक्ट को एक मूल्यवान इंफ्रास्ट्रक्चर रिसोर्स में बदलने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

Post navigation

About the Author

Avatar

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics)

Administrator

Visit Website View All Posts

Post navigation

Previous: नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन

Related Stories

नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन
  • UTTARAKHAND NEWS

नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026
उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर
  • UTTARAKHAND NEWS

उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026
जिला योजना-डीएम ने विभागों को दिए प्रगति बढाने के निर्देश
  • UTTARAKHAND NEWS

जिला योजना-डीएम ने विभागों को दिए प्रगति बढाने के निर्देश

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 11, 2026

RECENT POSTS

  • स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह September 12, 2026
  • नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन September 12, 2026
  • उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर September 12, 2026

You may have missed

स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
  • UTTARAKHAND NEWS

स्टील स्लैग की सड़कें निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकती हैं और चार गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026
नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन
  • UTTARAKHAND NEWS

नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का आकस्मिक निधन

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026
उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर
  • UTTARAKHAND NEWS

उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 12, 2026
जिला योजना-डीएम ने विभागों को दिए प्रगति बढाने के निर्देश
  • UTTARAKHAND NEWS

जिला योजना-डीएम ने विभागों को दिए प्रगति बढाने के निर्देश

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) September 11, 2026
Copyright © All rights reserved. Subject to Dehradun Jurisdiction Only in case of any dispute. | MoreNews by AF themes.