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जल जीवन मिशन 2.0 के तहत उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) April 29, 2026 1 minute read
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए
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PIB Delhi/DDN-जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद, सुधार से संबंधित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर आज उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा राज्यों के साथ हस्ताक्षर किए गए।

सुधार से संबंधित समझौता ज्ञापन में ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल प्रशासन मॉडल को अनिवार्य किया गया है, जो जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

सुधार से संबंधित इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल नियमित रूप से उपलब्ध हो, इसके लिए जन भागीदारी को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलेगा, जो विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में अलग-अलग निर्धारित बैठकों के दौरान समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। उक्त तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपने-अपने निर्धारित समय के अनुसार वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जो उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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समझौता ज्ञापन पर श्रीमती स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव (जल), डीडीडब्ल्यूएस, और श्री रणवीर सिंह चौहान, सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उत्तराखंड के बीच हस्ताक्षर किए गए। समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान करने के लिए उत्तराखंड के निवास आयुक्त श्री अजय मिश्रा, डीडीडब्ल्यूएस के कार्यालय में स्वयं उपस्थित थे।

कर्नाटक राज्य के साथ समझौता ज्ञापन पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, आरडीपीआर और आईटी और बीटी मंत्री, प्रियांक खर्गे और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए ।

डीडीडब्ल्यूएस की संयुक्त सचिव (जल) श्रीमती स्वाति मीना नाइक और कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के सचिव श्री समीर शुक्ला के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और उसका आदान-प्रदान किया गया।

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त्रिपुरा राज्य के लिए, समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति में हुआ।

यह समझौता ज्ञापन त्रिपुरा की संयुक्त सचिव (जल) श्रीमती स्वाति मीना नाइक और लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री अभिषेक सिंह के बीच हस्ताक्षरित किया गया और त्रिपुरा की निवास आयुक्त श्रीमती ब्रम्मीत कौर द्वारा इसका आदान-प्रदान किया गया।

 

समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन शामिल थे, तथा डीडीडब्ल्यूएस के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘जल जीवन मिशन’ ग्रामीण स्तर तक व्यापक रूप से पहुँच चुका है, और यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में गरिमा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक जन-केंद्रित आंदोलन के रूप में उभरा है।

मिशन की समयसीमा में हुए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए श्री पाटिल ने कहा कि मूल समय सीमा मई 2024 थी, लेकिन प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में 100 प्रतिशत नल के पानी की उपलब्धता और स्वच्छता हासिल करना है।

इस संदर्भ में, श्री पाटिल ने तीनों राज्यों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में किए जा रहे अच्छे कार्यों को जारी रखें और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीण जल आपूर्ति के संचालन और रखरखाव को लागू करें। राज्य-विशिष्ट संदर्भों को संबोधित करते हुए, श्री पाटिल ने उत्तराखंड की उत्कृष्ट उपलब्धि का उल्लेख किया, जिसमें जेजेएम के तहत 98% कवरेज हासिल किया गया है और 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।

कर्नाटक राज्य को संबोधित करते हुए उन्होंने अधिकारियों से राज्य भर में केंद्रीय योजनाओं को ठीक से लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में जल संबंधी मुद्दों की समीक्षा करने और जेजेएम 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए सुधारात्मक उपाय करने का भी आग्रह किया।

अपने संबोधन में, श्री पाटिल ने हर घर जल योजना के तहत त्रिपुरा की 86% उपलब्धि की सराहना की और राज्य से आग्रह किया कि शेष गांवों में हर घर जल की रिपोर्टिंग और प्रमाणीकरण को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।

श्री सी.आर. पाटिल ने तीनों राज्यों से जेजेएम 2.0 दिशानिर्देशों के अनुसार संचालन एवं रखरखाव नीति के उचित कार्यान्वयन पर जोर दिया, साथ ही जेजेएम डैशबोर्ड पर कार्यान्वयन से संबंधित दस्तावेजी डेटा उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया। उन्होंने सुजल गांव आईडी के निर्माण, डीटीयू की स्थापना और प्रत्येक जिले में नियमित डीडब्ल्यूएस बैठकों के समय पर आयोजन पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य स्तर पर संचालन एवं रखरखाव और रेट्रोफिटिंग के कार्यान्वयन की लागत राज्यों को वहन करनी होगी।

श्री पाटिल ने आगे कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाला एक मिशन है, जो विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के स्वास्थ्य, गरिमा और जीवन की गुणवत्ता में बुनियादी सुधार ला रहा है। इसलिए, प्रत्येक गाँव में नियमित और निरंतर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए और जन शिकायतों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने हमेशा केंद्र सरकार के सहयोग से काम किया है। उन्होंने राज्य में 98% घरों में नल के पानी का कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध होने की बात कही। उन्होंने  सी.आर. पाटिल को उनके सहयोग, समर्थन और मार्गदर्शन के लिए विशेष आभार व्यक्त किया, और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान यह विश्वास जताया कि इससे जेजेएम के कार्यों में तेज़ी आएगी, जो हिमालयी राज्य के 14 लाख ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड के भूभाग, भूस्खलन और आपदाओं की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य संतुलित पारिस्थितिकी-आर्थिक प्रयास अपना रहा है, जिनमें डिजिटल निगरानी, ​​ग्लेशियर अनुसंधान, ढलान संरक्षण, वृक्षारोपण और जन जागरूकता शामिल हैं। उन्होंने एसएआरएआरए (स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी) के माध्यम से प्राप्त लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत पिछले वर्ष 6,500 से अधिक जल स्रोतों का उपचार किया गया और 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर वर्षा जल का संचयन किया गया; साथ ही, ‘जल शक्ति अभियान’ के अंतर्गत 1,000 गांवों को पुनर्जीवित किया गया।

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उन्होंने यह प्रतिबद्धता जताई कि राज्य सरकार समझौता ज्ञापन के सभी बिंदुओं का पालन करेगी, और यह आश्वासन दिया कि उत्तराखंड, जेजेएम 2.0 के तहत परिकल्पित संरचनात्मक सुधारों को समय पर लागू करके और उनका सख्ती से पालन करके, उस भरोसे को कायम रखेगा जो उस पर जताया गया है; इसमें गुणवत्तापूर्ण कार्यों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर, देश के दूसरे सबसे शुष्क राज्य होने के बावजूद, संरचनात्मक जल संकट की चुनौतियों के बीच ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कर्नाटक की 87% प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य की सतत विकास-आधारित पहलों पर बल दिया, जो प्रत्येक घर के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय पेयजल सुनिश्चित करती हैं और कार्यान्वयन में गुणवत्ता मानकों को बरकरार रखती हैं।

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लंबित धनराशि जारी करने की तात्कालिकता पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने जेजेएम 2.0 को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की पूर्ण प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक उन पहले राज्यों में से एक है, जिसने व्यापक ओ&एम नीति और लिंग-संतुलित सदस्यों वाली ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को लागू किया है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने जेजेएम के तहत 86% कवरेज पर प्रकाश डाला, जो 2019 में जेजेएम की शुरुआत के समय मात्र 3% था। जेजेएम के तहत राज्य की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि जल सेवा आंकालान परियोजना अब तक 151 ग्राम पंचायतों में पूरी हो चुकी है और जल एवं स्वच्छता मिशन की रीढ़ के रूप में सभी 8 जिलों में जिला तकनीकी इकाइयां गठित की गई हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य जेजेएम 2.0 के दिशानिर्देशों के अनुसार ओ&एम नीति के कार्यान्वयन पर लगातार काम कर रहा है, जो मई 2026 तक शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने राज्य के प्रत्येक घर में सुरक्षित और टिकाऊ नल जल आपूर्ति के लिए जेजेएम 2.0 दिशानिर्देशों के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

टेबल पर बैठे एक व्यक्ति का कोलाज (एआई द्वारा निर्मित सामग्री गलत हो सकती है)।

अपने शुरुआती संबोधन में, डीडब्ल्यूएसडब्ल्यू के सचिव श्री अशोक के.के. मीना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, ‘जल जीवन मिशन’ के तहत राज्य और केंद्र के बीच एक साझा प्रतिबद्धता है, जिसका उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित, शुद्ध और टिकाऊ पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते के तहत, ग्राम पंचायतों को अब ग्राम जल प्रणालियों के प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल कर संग्रह की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस प्रयास को समर्थन देने के लिए, उन्होंने ज़िला प्रशासनों से आग्रह किया कि वे गाँव-स्तरीय संतृप्ति योजनाओं को अंतिम रूप देने और प्रमाणित करने के लिए ‘ज़िला जल एवं स्वच्छता मिशन’ (डीडब्ल्यूएसएम) की नियमित बैठकें आयोजित करें।

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