PIB DEHRADUN-आईआईटी रुड़की ने स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से अपने दीक्षांत समारोह हॉल में “विजन 2047: समृद्ध एवं महान भारत 2.0” पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक उद्घाटन किया, जिसमें प्रख्यात शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं ने भारत के विकासात्मक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत मंच पर उपस्थित विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों के औपचारिक स्वागत के साथ हुई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री काविंदर गुप्ता जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्ट अतिथियों में प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की; प्रो. यू. पी. सिंह, उप-निदेशक, आईआईटी रुड़की; प्रो. एन. पी. पाध्य, निदेशक, एमएनआईटी जयपुर; प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कार्यकारी अध्यक्ष, स्वदेशी शोध संस्थान; प्रो. अजीत चतुर्वेदी, कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय; तथा प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति, दून विश्वविद्यालय शामिल रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान, कुलगीत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का सम्मान किया गया। अपने स्वागत भाषण में प्रो. के. के. पंत ने वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण में शिक्षा, शासन और उद्योग के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उद्योग के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और उद्यमिता नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विषय-परिचय प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय विकास, नवाचार और नीतिगत सुधारों पर चर्चा की दिशा निर्धारित की। उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय रोजगार नीति का परिचय और शुभारंभ रहा, जो रोजगार सृजन और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में एक दूरदर्शी पहल को दर्शाता है।
कार्यक्रम में कई प्रभावशाली संबोधन शामिल रहे, जिनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का वर्चुअल संबोधन तथा स्वदेशी जागरण मंच के श्री सतीश कुमार जी का मुख्य भाषण शामिल था। भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री उपेंद्र राय तथा प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने भी राष्ट्र निर्माण और उच्च शिक्षा पर अपने विचार साझा किए। श्री के. एन. रघुनंदन जी ने राष्ट्रीय विकास में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला, इसके पश्चात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा का वर्चुअल संबोधन हुआ।
मुख्य अतिथि काविंदर गुप्ता ने अपने विस्तृत संबोधन में भारत की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समेकित नीतिगत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में देश-विदेश के 100 से अधिक संस्थानों की भागीदारी रही, जिसमें विजन 2047 के अनुरूप समावेशी आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, रोजगार सृजन, सतत विकास तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण जैसे विषयों पर केंद्रित विचार-विमर्श किया गया।
उद्घाटन समारोह शैक्षणिक गहराई और सांस्कृतिक गरिमा का सशक्त संगम रहा, जिसने नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के नेताओं के बीच संवाद के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया। राष्ट्रीय रोजगार नीति का शुभारंभ इस सत्र का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसने भविष्य उन्मुख कौशल और कार्यबल परिवर्तन पर सार्थक चर्चा को प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति, प्रेरणादायक विचारों और दूरदर्शी पहलों के अनावरण ने सम्मेलन के लिए एक सकारात्मक दिशा निर्धारित की।
गणमान्य अतिथियों ने सेंटर फॉर प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग का भौतिक उद्घाटन भी किया—जो भारी उद्योग मंत्रालय (MHI), सेवरन, फॉर्विया हेल्ला, iHub दिव्यसम्पर्क, ICAT, ओमरॉन तथा अन्य उद्योग भागीदारों के सहयोग से स्थापित एक महत्वपूर्ण पहल है—जो संस्थान के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है। इस पहल के अंतर्गत विकसित सुविधाएं प्रो. अक्षय द्विवेदी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में स्थापित की गई हैं, जिनका इस उन्नत अनुसंधान अवसंरचना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
दौरे के दौरान गणमान्य अतिथियों ने आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां उन्होंने उन्नत उपकरणों और चल रहे अनुसंधान कार्यों का अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल को “दिव्यांगजन हेतु सुलभ गतिशीलता वाहन” भी प्रस्तुत किया गया, जिसे याली मोबिलिटी द्वारा AARTI फाउंडेशन, आईआईटी रुड़की, भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह वाहन समावेशी डिजाइन और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो दिव्यांगजनों के लिए गतिशीलता समाधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सम्मेलन के अंतर्गत एक आकर्षक प्रदर्शनी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें कई स्टार्टअप्स ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया, जो नवाचार-आधारित विकास और आत्मनिर्भरता के विजन 2047 के लक्ष्य में उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
उद्घाटन समारोह ने सम्मेलन के लिए एक सशक्त आधार तैयार किया, जिसका उद्देश्य एक समृद्ध एवं वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण हेतु नवाचार और क्रियाशील रणनीतियों को बढ़ावा देना है
